दिव्यांग पीड़ितों की संख्या में विरोधाभास
हरदा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में दिव्यांग पीड़ितों की संख्या और लंबित मुआवजे को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। भोपाल स्थित एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान प्रशासन की रिपोर्ट और हस्तक्षेपकर्ताओं के दावों में बड़ा विरोधाभास सामने आया। प्रशासन की अनुपालन रिपोर्ट में हादसे के सिर्फ छह पीड़ितों को दिव्यांग बताया गया है, जबकि हस्तक्षेपकर्ताओं का दावा है कि इस हादसे में 67 लोग स्थायी रूप से दिव्यांग हुए हैं। दोनों आंकड़ों में भारी अंतर को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार से दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। एनजीटी ने लंबित मुआवजे पर भी राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।

लंबित मुआवजा राशि
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, घायल एवं दिव्यांग पीड़ितों को 24,06,992 रुपये का भुगतान अभी शेष है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह राशि फैक्ट्री मालिकों से वसूली के बाद प्रभावितों को दी जाएगी। इस पर ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार से अगली सुनवाई तक यह बताने के निर्देश दिए हैं कि बकाया राशि की वसूली और पीड़ितों को भुगतान कब तक पूरा किया जाएगा।
दिव्यांगता के आकलन पर आरोप
हरदा जिले में 6 फरवरी 2024 को पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेकर प्रकरण दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई घायलों की दिव्यांगता का सही आकलन नहीं किया गया है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने संजय सिंह का मामला रखते हुए कहा कि प्रशासनिक रिपोर्ट में उनकी दिव्यांगता 13 प्रतिशत दर्ज है, जबकि वास्तविक दिव्यांगता इससे कहीं अधिक है। इस संबंध में विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए ट्रिब्यूनल ने हस्तक्षेपकर्ताओं को चार सप्ताह का समय दिया है। वहीं, फैक्ट्री मालिकों की ओर से भी राज्य सरकार की रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे एनजीटी ने स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
