शहर की जर्जर सड़कों को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम और याचिकाकर्ता, दोनों को 10 दिनों के भीतर संबंधित सड़कों की ताजा तस्वीरें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब शहर की सड़कों की मौजूदा स्थिति का आकलन पुराने रिकॉर्ड के बजाय नवीनतम फोटो के आधार पर किया जाएगा।

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि सड़क निर्माण और मरम्मत के दावों में कितनी सच्चाई है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि मई 2025 में दायर जवाब के साथ सड़क निर्माण और मरम्मत की तस्वीरें अदालत में पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी हैं। निगम ने दावा किया कि शहर की अधिकांश सड़कों की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो चुकी है और निर्माण कार्य लगातार जारी है।
वहीं, याचिकाकर्ता ने नगर निगम के दावों का विरोध करते हुए कहा कि ग्वालियर की कई प्रमुख सड़कें अभी भी जर्जर और वाहन चलाने योग्य नहीं हैं। याचिकाकर्ता का तर्क था कि निगम द्वारा कराया गया निर्माण कार्य अपर्याप्त है और वास्तविक स्थिति को दर्शाने के लिए नई तस्वीरों को रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
